पहले तो सभी मित्रों को हिंदी दिवस की शुभकामनायें। हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है और हमें उस पर गर्व होना चाहिये। बहुत दुख होता है कि लोग बड़ी बड़ी देशभक्ति की बातें करते हैं, पर हर कार्य मे प्राथमिकता उसे देते हैं, जिसे अंग्रेजी का ज्ञान अधिक हो, भले ही अपने विषय मे वो शून्य हो। आज दक्षता की जगह दिखावा ले चूका है। यदि आप धोती कुर्ता या कुर्ता पजामा पहनते हैं तो आप को वो सम्मान हासिल नहीं होगा जो सूट बूट पहनने से होता है, कुछ राजनेता अवश्य अपवाद हैं।
आज समाचारों में जब मोदी जी को बुलेट ट्रैन परियोजना का आरम्भ करते देखा तो हँसी आ गयी, जहाँ हम छोटी छोटी परियोजनाओं को ढंग से कार्यान्वित नही कर पा रहे, हर दूसरे दिन किसी न किसी तकनीकी कारण से कोई न कोई ट्रैन दुर्घटना का शिकार हो जाती है, GST तो एक बड़ी परियोजना है। RTO का और भी बुरा हाल है. 3 दिन के काम मे 30 दिन लग रहे हैं, कोई भी सरकारी साइट उठा कर देख लो, सबका ऐसा ही हाल है।
फिर भी अच्छा लगा कम से कम मोदी जी आगे की तो सोचते हैं, जबरदस्ती ही सही पर आज देश बहुत आगे बड़ गया है, शायद 6 या 9 महीनों मे ये सब समस्यायेँ समाप्त हो चुकी होंगी, तभी लोग जान पायेंगे GST का वास्तविक लाभ क्या है।
अंत मे कभी किसी को उसके पहनावे या मात्र अंग्रेजी के ज्ञान के आधार पर judge मत करें, किताबी ज्ञान, व्यवहारिक ज्ञान के आगे कुछ भी नहीं। धन्यवाद।
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