देह शिवा बर मोहे ईहे,
शुभ कर्मन ते कभुं न टरूं:
न डरौं अरि सौं जब जाय लड़ौं,
निश्चय कर अपनी जीत करौं ।।
एक तरफ़ 10000 अफ़ग़ान सिपाही दूसरी और सिर्फ 21 सिख सिपाही। तारीख 12 सितम्बर 1897, स्थान - खैबर-पखतुन्खवा
निर्णय लेना था - युद्ध या पलायन। निर्णय लिया दल के नेता सरदार ईशर सिंह ने - मृत्यु तक युद्ध। और फिर ऐसा हुआ जिसने इस युद्ध को विश्व के सबसे महानतम युद्धों मे एक बना दिया। 21 के 21 वीरों ने शहादत प्राप्त की, पर शहीद होने से पहले हर एक सिख सैनिक ऐसा लड़ा जैसे खुद काल मौत बन कर अफग़ान सैनिकों पर टूट पड़ा हो, अफ़ग़ान सेना पूरी कोशिश करने के बावजूद विजय हासिल नहीं हर पायी और उसके 10000 सैनिक भी, 21 सिख सैनिकों के आगे कम पड़ गये।
यदि संकल्प सच्चा हो, हिर्दय मे ईश्वर का वास हो, तो कुछ भी असम्भव नहीं।

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