Sunday, 10 September 2017

अपनी आदतों को आप सुधारें


कल कुछ बात चल रही थी, किसी ने कहा आदत नहीं छूटती, अगर एक बार लग जाये तो। सच कहा। मैंने अपने कार्यकाल मे करीब तीन बेहद प्रतिभावान लोगों को पान मसाला (गुटका), अति धूम्रपान और शराब की आदत के चलते काल का ग्रास बनते देखा है। पर क्या कोई आदत छोड़ना सचमुच इतना मुश्किल है। मुझे ओशो पर लिखी एक घटना याद आ गयी, जो मैंने कई वर्ष पूर्व पढ़ी थी। एक बार एक व्यक्ति ओशो के पास आया और बोला, महाराज मुझे कई बुरी आदतों ने जकड रखा है, जो मुझे छोड़ती नही, कोई उपाय बताइये ?
ओशो ने कुछ नहीं कहा, अपने स्थान से उठे और एक पेड़ को जाकर अपनी बाँहों में जकड लिया और चिल्लाने लगे, मुझे कोई बचाओ, इस पेड़ ने मुझे पकड़ लिया है, वो व्यक्ति हैरान होकर बोला, महाराज आप कैसी बात कर रहे हैं, पेड ने आपको नही, आपने पेड़ को पकड़ रखा है। ये सुनते ही ओशो ने पेड़ को छोड़ दिया और बोले यही तो मै समझाना चाह रहा था, तुम्हे आदतों ने नही, तुमने आदतों को पकड़ रखा है। जिस तरह मैंने पेड़ को छोड़ दिया, तुम अपनी आदतें छोड़ दो।
सच को सुनना, समझना और स्वीकार करना बेहद कठिन है, पर जिसने ये क़ाबलियत हासिल कर ली, उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं रहता।
सच, आज हम मे से कई शिकायत करते हैं, कि जल्दी उठना चाहते हैं, पर देर तक सोने की आदत है, TV, whatsapp, FB पर वक़्त बरबाद करते हैं, पर आदत छूटती नहीं, तो ऐसे मे बस इतना याद रखो, किआपके मन के मालिक आप खुद हो, कौन सी आदत अच्छी है और कौन सी नही, किसे अपनाना है और किसे नहीं, इसका निर्णय सिर्फ और सिर्फ आप को लेना है।

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