साई बाबा की शिक्षायें (भाग -4 )
साई बाबा की एक बात जो मुझे सबसे अच्छी लगती है, वो हमेशा कहा करते थे जो भी काम करो दिल से (Wholeheartedly) करो वरना मत करो। हालाँकि उनके ये उपदेश धर्म ग्रंथों के पठन के बारे में अधिक थे, जब उन्होंने देखा की अधिकांश लोग बिना अर्थ समझे नित्य प्रति ग्रंथों का पठन करते है वो भी अशुद्ध उच्चारण के साथ। ऐसा प्रतीत होता था, कि वो ऐसा ईश्वर के प्रति आस्था और प्रेम के भाव से कम और भय और औपचारिकता के भाव से ज्यादा करते थे।
जब कई वर्ष पूर्व मैंने ये कथा पढ़ी थी, तो प्रेरित होकर हनुमान चालीसा और जपजी साहिब की विस्तृत व्याख्या पढ़ी और हैरान हो गया, जो अर्थ मै समझता था और जो वास्तविक अर्थ थे वो पुरणत्या भिन्न थे।
बाबा की ये शिक्षा मात्र धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र के लिए ही नहीं है वरन सांसारिक कार्य कलापों के लिए भी उतनी महत्वपूर्ण है। जीवन मे कार्यकाल के दौरान कई बार ऐसे लोगों से मिला जो अपने काम से खुश नही होते थे, उन्हें लगता था संसार का सबसे ज्यादा boring और सिरदर्द वाला काम शायद वही कर रहे है जैसे Data Entry या Reconciliations और उनका यही attitude उनके काम को और भी मुश्किल बना देता था।
इसीलिए कहते है या तो वो काम करो जो दिल को पसंद हो, अगर ऐसा काम नहीं मिलता, तो जो भी काम मिले उसे दिल से करो। ये भी एक सच्चाई है जब आप छोटे काम भी दिल से करते हैं तो बड़े काम आपने आप आपको मिलने लगते हैं। उन लोगों को कोई पसंद नहीं करता जो काम को लेकर हमेशा रोते रहते हैं, वरन जो हर काम को चुनौती मान अपना सर्वश्रेस्ट देने का प्रयत्न करते हैं।
इसीलिए जीवन में कोई भी काम छोटा हो या बड़ा दिल से करो, ख़ुशी से करो। _/\_
#100SaiBaba Lesson 4.
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